“जयशंकर ने G20 समिट पर शी और पुटिन की अभाव को देखा: असाधारण नहीं”

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“जयशंकर का कहना है कि G20 समिट पर शी और पुटिन की अभाव असाधारण नहीं”

2023 के G20 समिट पर, चीन के नेता शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुटिन की अभाव की खबरें सुर्खियों में आईं हैं। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर ने इसे “असाधारण” माना है और कहा है कि ऐसी स्थिति बार-बार आती जाती है।

जयशंकर ने बताया कि ऐसी प्रक्रियाएँ विश्व घड़ी के साथ आती जाती हैं, और यह गैर-सामान्य है कि समय-समय पर किसी भी देश के नेताओं को ऐसे सम्मेलनों में भाग नहीं लेना पड़ता है। उन्होंने इसे एक “डायनेमिक प्रक्रिया” के रूप में वर्णित किया, जिसमें देशों के नेताओं को उनके राष्ट्रिय या अंतरराष्ट्रीय कार्यक्षेत्रों के लिए प्राथमिकता दी जाती है।

इसके बावजूद, इस घड़ी का महत्वपूर्ण और विवादास्पद संदेश हो सकता है। शी और पुटिन दोनों दुनिया के महत्वपूर्ण राजनीतिक और आर्थिक खिलाड़ी हैं, और उनकी अभावी या अवगति के पीछे कई कारण हो सकते हैं।

चीन के नेता शी जिनपिंग का गैर-हजर होना दुनिया भर में देखा गया है, खासकर जब वह कोविड-19 महामारी की वजह से अपनी देश के अंदर ही बिजी रहे थे। उनकी उपस्थिति की कमी कई व्यक्तिगत और विश्व स्तरीय मुद्दों के बारे में सवाल उठा सकती है, जैसे कि ताइवान, दक्षिण चीन सागर, और क्यूबा के मामले।

व्लादिमीर पुटिन के मामले में, वह अपने स्वरूप के साथ कई संघर्षों का सामना कर रहे हैं, जैसे कि उक्रेन और विपक्षी राजनीतिक गतिविधियों के साथ संघर्ष। उनकी अभावी उपस्थिति भी अपने स्वरूप के चर्चा को और बढ़ा सकती है, खासकर जब वह रूस के और विश्व के राजनीतिक मामलों में कितने महत्वपूर्ण होते हैं।

सुब्रमण्यम जयशंकर के इस बयान से स्पष्ट होता है कि भारत इस अवसर को एक “सामान्य” घटना के रूप में देख रहा है और उन्होंने यह बताया कि ऐसे घटने समय-समय पर होते रहते हैं। इसके बावजूद, इसका गहरा और विस्तारित अर्थ हो सकता है, जो बदलते राजनीतिक मानदंडों और दुनिया के संबंधों की एक नई परिप्रेक्ष्य की ओर संकेत कर सकता है।

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