“भारतीय रिज़र्व बैंक ने आई-सीआरआर के फेज़ड बंद करने का प्रारंभ किया, तुरंत प्रभावी”

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भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा निर्णय लिया है जिसका प्रभाव तुरंत आरंभ होगा। यह निर्णय है – “आई-सीआरआर” (Incremental Cash Reserve Ratio) के फेज़ड बंद करने का। यह फैसला वित्तीय बाजारों और बैंकों के लिए महत्वपूर्ण है, और यह भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव डालेगा।

आई-सीआरआर क्या है? यह एक वित्तीय प्रणाली है जिसे RBI अपने द्वारा लाया गया था जब कोविड-19 पैंडेमिक के बढ़ते प्रभाव के समय। इसका मुख्य उद्देश्य बैंकों के पास अधिशेष नकद धन जमा करने का आदरणीय उपाय प्रदान करना था। आई-सीआरआर के अनुसार, बैंकों को निर्धारित समय सीमा के अंतर्गत नकद धन जमा करना आवश्यक था, और यह बैंकों के लिए अधिशेष वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने का उपाय था।

हालांकि, अब भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस नीति को फेज़ड रूप से बंद करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय तुरंत प्रभावी हो रहा है, और बैंकों को आई-सीआरआर के तहत नकद धन जमा करने के लिए निर्धारित समय सीमाओं का पालन नहीं करने की अनुमति देता है। इससे बैंकों को अधिक वित्तीय विस्तार करने और लोन देने के लिए अधिक नकद उपलब्ध हो सकता है, जो आर्थिक सकारात्मकता को बढ़ावा देगा।

यह निर्णय भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव डाल सकता है। आई-सीआरआर के अंतर्गत नकद जमा करने की अनिवार्यता कम होने से वित्तीय प्रणाली के गतिविधियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यह संकेत देता है कि RBI वित्तीय संचालन को सुविधाजनक बनाने और वित्तीय बाजारों को आरामदायक करने के लिए कदम उठा रहा है।

इस निर्णय के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों का सुझाव देने के लिए वित्तीय विशेषज्ञों और वित्तीय संगठनों का ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ सकता है, यह तय करना महत्वपूर्ण होगा, और सरकार और RBI दोनों को इस निर्णय के प्रभाव का सामरिक रूप से जांचने की जिम्मेदारी होगी।इस प्रारंभिक फैसले के बावजूद, वित्तीय बाजारों और बैंकों को इस नई नियम का पालन करने के लिए सावधान रहना होगा ताकि वे नियमों का अनुसरण कर सकें और समय पर सही कदम उठा सकें।”

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