जी20 देशों और नए जुड़े अफ्रीकी संघ समेत अतिथि देशों के सांसद दिल्ली के भव्य इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर, द्वारका में इकट्ठा हुए। यहां उन्होंने धरती के भविष्य को ध्यान में रखते हुए आवश्यक जीवनशैली पर विचार-विमर्श किया। लाइफ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) पर संसदीय फोरम की यह बैठक नौवें जी20 संसदीय अध्यक्षों के शिखर सम्मेलन (पी20) के भव्य उद्घाटन से एक दिन पहले आयोजित की गई। इस दौरान कानून निर्माताओं ने मानवता के सामने मौजूद साझा चुनौतियों और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनसे निपटने के रास्ते पर अपने विचार सामने रखे। ‘जलवायु परिवर्तन जैसी समसामयिक चुनौतियों से निपटने का नया तरीका‘ संसदीय फोरम को संबोधित करते हुए दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की लोकसभा के अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रस्तावित लाइफ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) मिशन ने जलवायु परिवर्तन जैसी समकालीन चुनौतियों से निपटने और सतत विकास, स्वास्थ्य सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक नया नजरिया दिया है। अध्यक्ष ने कहा कि मिशन लाइफ पर्यावरण संरक्षण का एक व्यापक दृष्टिकोण है जो हर शख्स को कम उपयोग, फिर से इस्तेमाल करने और रीसाइकल…
Month: October 2023
7 करोड़ से अधिक बच्चों के मापन से पता चला है कि वैश्विक भूख सूचकांक में उपयोग किए गए बच्चों की संख्या का लगभग एक-तिहाई बेकार है
भारत सरकार ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 (मिशन पोषण 2.0) के अंतर्गत कुपोषण की…
नारी शक्ति तेजी से आगे बढ़ी!
महिला श्रम बल भागीदारी दर बढ़कर 37.0 प्रतिशत सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा 9 अक्टूबर 2023 को जारी आवधिक…
नई दिल्ली में आयोजित 9वें G20 संसदीय अध्यक्ष शिखर सम्मेलन के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ
जी-20 Parliamentary Speakers Summit में, मैं आप सभी का 140 करोड़ भारतवासियों की ओर से हार्दिक स्वागत करता हूं। ये समिट, एक प्रकार से दुनिया भर की अलग-अलग Parliamentary practices का महाकुंभ है। आप सभी डेलीगेट्स, अलग-अलग पार्लियामेंट्स की कार्यशैली के अनुभवी हैं। आपका इतने समृद्ध लोकतांत्रिक अनुभवों के साथ भारत आना, हम सभी के लिए बहुत सुखद है। साथियों, भारत में ये फेस्टिव सीज़न होता है। इन दिनों भारत भर में बहुत सारी फेस्टिव एक्टिविटीज़ चलती रहती हैं। लेकिन जी-20 ने इस बार फेस्टिव सीज़न के उत्साह को पूरे साल भर बनाए रखा है। हमने पूरे साल G-20 के डेलीगेट्स को भारत के अलग-अलग शहरों में होस्ट किया। इससे उन शहरों में फेस्टिविटी का माहौल बना रहा। इसके बाद भारत ने Moon पर लैंड किया। इसने पूरे देश में सेलिब्रेशन को और बढ़ा दिया। फिर, हमने यहां दिल्ली में ही एक सफल जी-20 समिट को होस्ट किया। और अब यहां ये P20 समिट हो रही है। किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत उसके लोग होते हैं, उसके लोगों की इच्छा-शक्ति होती है। ये समिट आज, लोगों की इस ताकत को भी सेलीब्रेट करने का माध्यम बनी है। साथियों, P20 समिट, उस भारत-भूमि पर हो रही है, जो mother of democracy है, जो दुनिया की सबसे बड़ी democracy है। दुनिया की विभिन्न पार्लियामेंट्स के प्रतिनिधि के तौर पर आप जानते हैं कि पार्लियामेंट्स, डिबेट और डेलिब्रेशन का महत्वपूर्ण स्थान होती है। हमारे यहां हज़ारों वर्ष पहले भी, डिबेट्स और डेलिब्रेशन्स के बहुत ही सटीक उदाहरण हैं। हमारे करीब 5 हज़ार साल से भी पुराने ग्रंथों में, हमारे वेदों में, सभाओं और समितियों की बात कही गई है। इनमें एक साथ आकर समाज के हित में सामूहिक निर्णय लिए जाते थे। हमारे सबसे पुराने वेद ऋग्वेद में भी कहा गया है- संगच्छ-ध्वं संवद-ध्वं सं, वो मनांसि जानताम् । यानि हम एक साथ चलें, हम एक साथ बोलें और हमारे मन एक हों। हमारे यहां तब भी ग्राम सभाओं में डिबेट के माध्यम से गांवों से जुड़े फैसले होते थे। ग्रीक दूत मेगस्थनीज ने भी भारत में जब इस तरह की व्यवस्था को देखा था, तो वो हैरान हो गए थे। उन्होंने भारत के विभिन्न राज्यों के इस सिस्टम पर विस्तार से लिखा है। आप ये जानकर भी हैरान रह जाएंगे कि हमारे यहां तमिलनाडु में 9th सेंचुरी का एक शिला-लेख है। इसमें Village legislatives के rules और codes का उल्लेख है। और आपके लिए ये जानना भी बहुत दिलचस्प होगा कि 12 सौ साल पुराने उस शिलालेख पर यहां तक लिखा हुआ है कि किस मेंबर को, किस कारण से, किस परिस्थितियों में disqualify किया जा सकता है। ये 12 सौ साल पहले की बात मैं कर रहा हूं। मैं आपको अनुभव मंटपा के बारे में भी बताना चाहता हूं। मैग्ना कार्टा से भी पहले, 12वीं शताब्दी में हमारे यहाँ “अनुभव मंटपा” की परंपरा रही है। इसमें भी डिबेट और डिस्कशन को encourage किया जाता था। “अनुभव मंटपा” में हर वर्ग, हर जाति, हर समुदाय के लोग अपनी बात के लिए वहां आते थे। जगतगुरु बसवेश्वरा की ये देन आज भी भारत को गौरवान्वित करती है। 5 हजार साल पुराने वेदों से लेकर आज तक की ये यात्रा, संसदीय परंपराओं का ये विकास, सिर्फ हमारी ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की धरोहर है। साथियों, समय के साथ भारत की संसदीय प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार हुआ है, ये प्रक्रियाएं और सशक्त हुई हैं। भारत में हम लोग जनरल इलेक्शन्स को सबसे बड़ा पर्व मानते हैं। 1947 में आजादी के मिलने के बाद से अभी तक भारत में 17 जनरल इलेक्शन्स और 300 से अधिक State Assemblies…
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दिल्ली के लाडो सराय में पीछा करने वाले ने टैक्सी में महिला को चाकू मार दिया
गुरुवार सुबह दक्षिणी दिल्ली के लाडो सराय में एक 23 वर्षीय महिला को एक कैब के…
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अजन्मे बच्चे के अधिकार बनाम माँ की पसंद, मुख्य न्यायाधीश का मुख्य प्रश्न
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