कांग्रेस ने रविवार को तेलंगाना में तीन लोकसभा सदस्यों और अपने सभी पांच मौजूदा विधायकों को…
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प्रधानमंत्री: कई वर्षों के बाद पार्वती कुंड और जागेश्वर मंदिर की यात्रा विशेष रही
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में पार्वती कुंड और जागेश्वर मंदिर को…
पवार सरकारी नौकरियों को संविदा के आधार पर भरने का विरोध करते हैं
मुंबई: जहां सरकारी नौकरियों और शिक्षा में विभिन्न समुदायों को आरक्षण का मुद्दा मराठा और अन्य…
नारी शक्ति तेजी से आगे बढ़ी!
महिला श्रम बल भागीदारी दर बढ़कर 37.0 प्रतिशत सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा 9 अक्टूबर 2023 को जारी आवधिक…
नई दिल्ली में आयोजित 9वें G20 संसदीय अध्यक्ष शिखर सम्मेलन के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ
जी-20 Parliamentary Speakers Summit में, मैं आप सभी का 140 करोड़ भारतवासियों की ओर से हार्दिक स्वागत करता हूं। ये समिट, एक प्रकार से दुनिया भर की अलग-अलग Parliamentary practices का महाकुंभ है। आप सभी डेलीगेट्स, अलग-अलग पार्लियामेंट्स की कार्यशैली के अनुभवी हैं। आपका इतने समृद्ध लोकतांत्रिक अनुभवों के साथ भारत आना, हम सभी के लिए बहुत सुखद है। साथियों, भारत में ये फेस्टिव सीज़न होता है। इन दिनों भारत भर में बहुत सारी फेस्टिव एक्टिविटीज़ चलती रहती हैं। लेकिन जी-20 ने इस बार फेस्टिव सीज़न के उत्साह को पूरे साल भर बनाए रखा है। हमने पूरे साल G-20 के डेलीगेट्स को भारत के अलग-अलग शहरों में होस्ट किया। इससे उन शहरों में फेस्टिविटी का माहौल बना रहा। इसके बाद भारत ने Moon पर लैंड किया। इसने पूरे देश में सेलिब्रेशन को और बढ़ा दिया। फिर, हमने यहां दिल्ली में ही एक सफल जी-20 समिट को होस्ट किया। और अब यहां ये P20 समिट हो रही है। किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत उसके लोग होते हैं, उसके लोगों की इच्छा-शक्ति होती है। ये समिट आज, लोगों की इस ताकत को भी सेलीब्रेट करने का माध्यम बनी है। साथियों, P20 समिट, उस भारत-भूमि पर हो रही है, जो mother of democracy है, जो दुनिया की सबसे बड़ी democracy है। दुनिया की विभिन्न पार्लियामेंट्स के प्रतिनिधि के तौर पर आप जानते हैं कि पार्लियामेंट्स, डिबेट और डेलिब्रेशन का महत्वपूर्ण स्थान होती है। हमारे यहां हज़ारों वर्ष पहले भी, डिबेट्स और डेलिब्रेशन्स के बहुत ही सटीक उदाहरण हैं। हमारे करीब 5 हज़ार साल से भी पुराने ग्रंथों में, हमारे वेदों में, सभाओं और समितियों की बात कही गई है। इनमें एक साथ आकर समाज के हित में सामूहिक निर्णय लिए जाते थे। हमारे सबसे पुराने वेद ऋग्वेद में भी कहा गया है- संगच्छ-ध्वं संवद-ध्वं सं, वो मनांसि जानताम् । यानि हम एक साथ चलें, हम एक साथ बोलें और हमारे मन एक हों। हमारे यहां तब भी ग्राम सभाओं में डिबेट के माध्यम से गांवों से जुड़े फैसले होते थे। ग्रीक दूत मेगस्थनीज ने भी भारत में जब इस तरह की व्यवस्था को देखा था, तो वो हैरान हो गए थे। उन्होंने भारत के विभिन्न राज्यों के इस सिस्टम पर विस्तार से लिखा है। आप ये जानकर भी हैरान रह जाएंगे कि हमारे यहां तमिलनाडु में 9th सेंचुरी का एक शिला-लेख है। इसमें Village legislatives के rules और codes का उल्लेख है। और आपके लिए ये जानना भी बहुत दिलचस्प होगा कि 12 सौ साल पुराने उस शिलालेख पर यहां तक लिखा हुआ है कि किस मेंबर को, किस कारण से, किस परिस्थितियों में disqualify किया जा सकता है। ये 12 सौ साल पहले की बात मैं कर रहा हूं। मैं आपको अनुभव मंटपा के बारे में भी बताना चाहता हूं। मैग्ना कार्टा से भी पहले, 12वीं शताब्दी में हमारे यहाँ “अनुभव मंटपा” की परंपरा रही है। इसमें भी डिबेट और डिस्कशन को encourage किया जाता था। “अनुभव मंटपा” में हर वर्ग, हर जाति, हर समुदाय के लोग अपनी बात के लिए वहां आते थे। जगतगुरु बसवेश्वरा की ये देन आज भी भारत को गौरवान्वित करती है। 5 हजार साल पुराने वेदों से लेकर आज तक की ये यात्रा, संसदीय परंपराओं का ये विकास, सिर्फ हमारी ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की धरोहर है। साथियों, समय के साथ भारत की संसदीय प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार हुआ है, ये प्रक्रियाएं और सशक्त हुई हैं। भारत में हम लोग जनरल इलेक्शन्स को सबसे बड़ा पर्व मानते हैं। 1947 में आजादी के मिलने के बाद से अभी तक भारत में 17 जनरल इलेक्शन्स और 300 से अधिक State Assemblies…
प्रधानमंत्री 13 अक्टूबर को 9वें जी20 संसदीय अध्यक्ष शिखर सम्मेलन (पी20) का उद्घाटन करेंगे
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 13 अक्टूबर 2023 को सुबह लगभग 11 बजे नई दिल्ली स्थित यशोभूमि में 9वें जी20 संसदीय अध्यक्ष शिखर सम्मेलन (पी20) का उद्घाटन…
बैठिए मैडम’: कनाडा विवाद पर प्रियंका चतुर्वेदी ने इल्हान उमर की क्लास ली
विभिन्न मुद्दों पर अपने भारत विरोधी रुख के लिए जानी जाने वाली अमेरिकी कांग्रेस सदस्य इल्हान…
उपराष्ट्रपति-समाज विकास नहीं कर सकता, अगर आप 50 प्रतिशत मानवता को न्याय नहीं देते
भारत के उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने आज इस बात पर जोर दिया कि जब तक पचास प्रतिशत मानवता के लिए न्याय सुनिश्चित नहीं किया जाता तब तक समाज का विकास नहीं हो सकता। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को एक ‘युगीन विकास’ के रूप में पारित करने की सराहना करते हुए, उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि यह विधेयक महिलाओं के अधिकारों की मान्यता और उनके अधिकार की पुष्टि है। आज राजस्थान में बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (बिट्स) पिलानी के छात्रों और संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा को सबसे ‘प्रभावी और प्रभावशाली’ तंत्र बताया, जिससे भारत के विकास में तेजी आएगी। लोकतंत्र में परिवर्तन के एजेंट और हितधारकों के रूप में छात्रों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते हुए, श्री धनखड़ ने उनसे अपने ‘प्रतिनिधियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जवाबदेही और नागरिक भागीदारी के महत्व को सुदृढ़ करते हुए प्रत्येक नागरिक को संसद में याचिका प्रस्तुत करने का अधिकार है। जी-20 की अध्यक्षता में भारत की सफलता पर प्रकाश डालते हुए, श्री धनखड़ ने इस बात पर जोर दिया कि जी-20 सदस्य के रूप में अफ्रीकी संघ को शामिल करना भारत के सभ्यतागत लोकाचार के साथ गहराई से मेल खाता है। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) पर हस्ताक्षर को वैश्विक ‘गेमचेंजर’ के रूप में स्वीकार करते हुए, उपराष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि प्रधान मंत्री के नेतृत्व में भारत द्वारा निभाई गई भूमिका ने ‘ग्लोबल साउथ’ को विश्व मंच पर एक मजबूत आवाज दी है।. एक दशक की अवधि में वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बीच ‘फ्रैजाइल फाइव’ के सदस्य से ‘बिग फाइव’ में भारत के परिवर्तन पर विचार करते हुए, श्री धनखड़ ने वैश्विक मंच पर डिजिटल लेनदेन एवं वित्तीय समावेशन में भारत की उपलब्धियों को प्राप्त व्यापक प्रशंसा की ओर ध्यान आकर्षित किया। भ्रष्टाचार को ‘लोकतंत्र और विकास का हत्यारा’ करार देते हुए, उपराष्ट्रपति ने बताया कि हाल के वर्षों में, सत्ता के दलालों के प्रभाव वाले सत्ता गलियारों को बेअसर करने के लिए महत्वपूर्ण प्रगति की गई है। इस बात पर जोर देते हुए कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है, श्री धनखड़ ने नागरिकों से ‘हमारे संस्थानों को कलंकित करने, बदनाम करने और कमजोर करने वाले भारत विरोधी वक्तव्यों का सक्रिय रूप से मुकाबला करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान, उपराष्ट्रपति ने अनुसंधान और विकास के सर्वोपरि महत्व को रेखांकित किया, उन विचारों की प्रधानता पर जोर दिया जो नवाचार का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि बिट्स पिलानी के पांच प्रशिक्षु संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में राज्यसभा के सभापति की सहायता करेंगे। श्री अर्जुन राम मेघवाल, केंद्रीय कानून और न्याय, संसदीय कार्य और संस्कृति राज्य मंत्री, प्रोफेसर वी. रामगोपाल राव, कुलपति, बिट्स पिलानी, प्रोफेसर सुधीरकुमार बरई, निदेशक, बिट्स पिलानी के संकाय सदस्य, छात्र और अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे ।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज देशव्यापी नौवें रोजगार मेले में करीब 51 हजार नवनियुक्त युवाओं को नियुक्ति-पत्र वितरित किए
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज देशव्यापी नौवें रोजगार मेले में करीब 51 हजार नवनियुक्त युवाओं को नियुक्ति-पत्र वितरित किए। देशभर से चुने…