
कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मदरसों के सर्वे को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व विधायक वारिस पठान ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए राज्य और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “ये लोग मदरसों के पीछे पड़ गए हैं और बार-बार मुस्लिम संस्थानों को निशाना बनाया जा रहा है।”
वारिस पठान ने कहा कि मदरसे शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र हैं और वहां पढ़ने वाले लाखों छात्रों का भविष्य इससे जुड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सर्वे के नाम पर मुस्लिम समुदाय को संदेह की नजर से देखा जा रहा है, जिससे समाज में गलत संदेश जा रहा है।
दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि यह सर्वे केवल प्रशासनिक और शैक्षणिक जानकारी जुटाने के लिए किया जा रहा है, ताकि मदरसों की स्थिति, छात्रों की संख्या और सुविधाओं का आकलन किया जा सके। अधिकारियों के अनुसार इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
मदरसा सर्वे को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दल इसे अल्पसंख्यक संस्थानों पर दबाव बनाने की कोशिश बता रहे हैं, जबकि सरकार इसे पारदर्शिता और शिक्षा सुधार की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है।
फिलहाल, इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है और आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक गर्मा सकता है।
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